निम्बार्क वैदिक संस्कृत समिति परिचय
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार एवं संस्कृत समिति के प्रमुख प्रेरणा स्त्रोत ब्रह्मलीन महन्त बनवारीशरण जी महाराज के आशीर्वाद से दिनांक 08 अक्टुबर 2009 को गठित समिति महन्त श्री मोहनशरण शास्त्री जी महाराज के संरक्षण एवं श्री आर. पी. शर्मा की अध्यक्षता में संचालित हैं। प्रारम्भ में समिति ने जिला स्तर पर कार्यारम्भ किया जो आज राज्य स्तर पर लोकप्रियता के साथ आगे बढ रहा हैं संस्कृत षिक्षा विभाग के अतिरिक्त सामान्य शिक्षा के छात्रों को जन आन्दोलन से जोड़ने के लिए राज्य के सभी जिलों में जिला समितियॉ गठित की जा रही है। वर्तमान में भीलवाड़ा, टोंक, उदयपुर, दौसा, जयपुर, बून्दी, नागौर, बाड़मेर, कोटा, सीकर, झालावाड़, बीकानेर, सवाईमाधोपुर, चितौडगढ़, अजमेर, राजसमन्द, बांसवाड़ा व सिरोही कुल 18 जिलों में समितियॉ गठित होकर कार्यारम्भ कर चुकी है तथा शेष जिलों में जिला समितियॉ का गठन प्रस्तावित है।
संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में फिर से स्थापित करने के उद्धेश्य से जन सामान्य तक पहुॅचाने के लिए प्रतिबद्ध - निम्बार्क वैदिक संस्कृत समिति विगत 16 वर्षों से कार्य कर रही है तथा विगत 13 वर्षां में इसके कार्यक्षेत्र का व्यापक विस्तार हुआ है। संस्कृत समिति ने अब तक संस्कृत संभाषण शिविरों, संस्कृत सम्मेलनों, युवाचार्य स्वामी ज्ञानानन्द जी तीर्थ शंकराचार्य मठ, भानपुरा पीठ, मध्यप्रदेष के सानिध्य में संस्कृत रथयात्रा एवं अनेक प्रतियोगिताओं का संचालन किया है। अब तक समिति ने भीलवाड़ा में 16 जिला स्तरीय संस्कृत समारोह आयोजित कर लिये हैं। जिनमें 1047 शिक्षकों /कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही इन समारोहों में 1949 छा़त्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जा चुका है। इसी प्रकार अब तक 16 राज्य स्तरीय संस्कृत वाङ्मय पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोहों का आयोजन समिति द्वारा किया जा चुका है। जिनमें 935 शिक्षकों /शिक्षा अधिकारियों, 2094 छात्र-छात्राओं कों राज्यस्तर पर सम्मानित किया जा चुका है
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